Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.22.18-19h: जैसे वर्षा ऋतु में व्याकुल समुद्र का भयंकर गर्जन सुनाई देता है, उसी प्रकार आक्रमणकारी कौरवों का भयंकर एवं भयानक कोलाहल दिखाई देने लगा। | mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषामापततां घोरस्तुमुल: समपद्यत॥ १८॥
क्षुब्धस्य हि समुद्रस्य प्रावृट्काले यथा स्वन:।
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में व्याकुल समुद्र का भयंकर गर्जन सुनाई देता है, उसी प्रकार आक्रमणकारी कौरवों का भयंकर एवं भयानक कोलाहल दिखाई देने लगा।
Just as the terrible roar of the agitated ocean is heard during the rainy season, similarly the fierce and dreadful uproar of those attacking Kauravas began to appear.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥