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mahabharat 9.22.14-15h: तब सात्यकि ने भी एक मुड़े हुए सिरे वाले बाण से राजा दुर्योधन को घायल कर दिया। तत्पश्चात द्रौपदी के पुत्रों ने राजा दुर्योधन पर तिहत्तर बाण छोड़े, धर्मराज ने पाँच और भीमसेन ने अस्सी बाण छोड़े।   |   mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  9.22.14-15h 
सात्यकिश्चैव राजानं शरेणानतपर्वणा।
द्रौपदेयास्त्रिसप्तत्या धर्मराजश्च पञ्चभि:॥ १४॥
अशीत्या भीमसेनश्च शरै राजानमार्पयन्।
 
 
अनुवाद
तब सात्यकि ने भी एक मुड़े हुए सिरे वाले बाण से राजा दुर्योधन को घायल कर दिया। तत्पश्चात द्रौपदी के पुत्रों ने राजा दुर्योधन पर तिहत्तर बाण छोड़े, धर्मराज ने पाँच और भीमसेन ने अस्सी बाण छोड़े।
 
Then Satyaki also wounded the king with an arrow having a bent tip. Thereafter Draupadi's sons shot seventy-three arrows at King Duryodhana, Dharmaraja shot five and Bhimasena shot eighty arrows at him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)