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mahabharat 9.22.11-12: उस टूटे हुए धनुष को फेंककर, माद्री के पुत्र पराक्रमी सहदेव ने हाथ में दूसरा विशाल धनुष लिया और राजा दुर्योधन पर आक्रमण किया तथा युद्धभूमि में उसे दस बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  9.22.11-12 
तदपास्य धनुश्छिन्नं माद्रीपुत्र: प्रतापवान्॥ ११॥
अभ्यद्रवत राजानं प्रगृह्यान्यन्महद् धनु:।
ततो दुर्योधनं संख्ये विव्याध दशभि: शरै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस टूटे हुए धनुष को फेंककर, माद्री के पुत्र पराक्रमी सहदेव ने हाथ में दूसरा विशाल धनुष लिया और राजा दुर्योधन पर आक्रमण किया तथा युद्धभूमि में उसे दस बाणों से घायल कर दिया।
 
Throwing away that broken bow, the mighty Sahadeva, son of Madri, took up another huge bow in his hand and attacked King Duryodhana and wounded him with ten arrows on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)