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mahabharat 9.21.5: वहाँ कृतवर्मा का शत्रुओं के साथ युद्ध अत्यन्त आश्चर्यजनक प्रतीत हुआ; क्योंकि अकेले उसने ही अजेय पाण्डव सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया था।   |   mahabharat अध्याय 9.21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  9.21.5 
तत्राश्चर्यमभूद् युद्धं सात्वतस्य परै: सह।
यदेको वारयामास पाण्डुसेनां दुरासदाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ कृतवर्मा का शत्रुओं के साथ युद्ध अत्यन्त आश्चर्यजनक प्रतीत हुआ; क्योंकि अकेले उसने ही अजेय पाण्डव सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया था।
 
There the battle of Kritavarma with the enemies appeared most astonishing; for he alone had stopped the progress of the invincible Pandava army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)