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mahabharat 9.21.36: जिस प्रकार यज्ञ में मन्त्रों से शुद्ध होकर महान अग्निदेव चमक उठते हैं, उसी प्रकार राजा दुर्योधन भी युद्ध में सब ओर से चमक रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  9.21.36 
यथा यज्ञे महानग्निर्मन्त्रपूत: प्रकाशवान्।
तथा दुर्योधनो राजा संग्रामे सर्वतोऽभवत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार यज्ञ में मन्त्रों से शुद्ध होकर महान अग्निदेव चमक उठते हैं, उसी प्रकार राजा दुर्योधन भी युद्ध में सब ओर से चमक रहे थे।
 
Just as the great Agnidev (fire god) shines brightly when purified by the mantras in a sacrifice, similarly King Duryodhana was shining brightly from all sides in the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)