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mahabharat 9.21.25-26h: इसके बाद उसने भाले से कृतवर्मा की छाती पर गहरा घाव कर दिया। तब युयुधान द्वारा घोड़ों और सारथि से वंचित किये गये कृतवर्मा अपना रथ छोड़कर युद्धभूमि में भूमि पर खड़े हो गये।   |   mahabharat अध्याय 9.21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  9.21.25-26h 
ततोऽपरेण भल्लेन हृद्येनं समताडयत्।
स युद्धे युयुधानेन हताश्वो हतसारथि:॥ २५॥
कृतवर्मा कृतस्तेन धरणीमन्वपद्यत।
 
 
अनुवाद
इसके बाद उसने भाले से कृतवर्मा की छाती पर गहरा घाव कर दिया। तब युयुधान द्वारा घोड़ों और सारथि से वंचित किये गये कृतवर्मा अपना रथ छोड़कर युद्धभूमि में भूमि पर खड़े हो गये।
 
After this he inflicted a deep wound on Kritavarma's chest with a spear. Then Kritavarma, who had been deprived of horses and charioteer by Yuyudhan, left his chariot and stood on the ground in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)