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mahabharat 9.21.24: किन्तु युद्धस्थल में सात्यकि ने अपने तीखे बाणों से उस भाले को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और मानो कृतवर्मा के मुँह में फेंक दिया हो, तथा टूटे हुए भाले को भूमि पर गिरा दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  9.21.24 
तच्छूलं सात्वतो ह्याजौ निर्भिद्य निशितै: शरै:।
चूर्णितं पातयामास मोहयन्निव माधवम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
किन्तु युद्धस्थल में सात्यकि ने अपने तीखे बाणों से उस भाले को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और मानो कृतवर्मा के मुँह में फेंक दिया हो, तथा टूटे हुए भाले को भूमि पर गिरा दिया।
 
But Satyaki, on the battlefield, cut that spear into pieces with his sharp arrows and, as if throwing Kritavarma in the mouth, dropped the shattered spear on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)