श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  9.21.22-23 
ततो राजन् महेष्वास: कृतवर्मा महारथ:।
हताश्वसूतं सम्प्रेक्ष्य रथं हेमपरिष्कृतम्॥ २२॥
रोषेण महताऽऽविष्ट: शूलमुद्यम्य मारिष।
चिक्षेप भुजवेगेन जिघांसु: शिनिपुङ्गवम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजन! महाधनुर्धर और सारथी कृतवर्मा अपने सुवर्ण-मंडित रथ को अश्व और सारथि से रहित देखकर अत्यन्त क्रोध से भर गए। महाराज! तब उन्होंने शनिप्रवर सात्यकि को मार डालने की इच्छा से एक शूल उठाकर अपनी भुजाओं के वेग से उसे चलाया। 22-23॥
 
Rajan! Kritavarma, the great archer and charioteer, was filled with great anger after seeing his gold-adorned chariot without its horse and charioteer. Sir! Then, with the desire to kill Shanipravar Satyaki, he picked up a prong and launched it with all the speed of his arms. 22-23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd