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mahabharat 9.21.2: अपनी सेना की व्यूहरचना टूटी हुई देखकर पराक्रमी योद्धा एवं महारथी कृतवर्मा ने शत्रु सेना को युद्ध-क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.21.2 
तत् प्रभग्नं बलं दृष्ट्वा कृतवर्मा महारथ:।
दधार समरे शूर: शत्रुसैन्यं महाबल:॥ २॥
 
 
अनुवाद
अपनी सेना की व्यूहरचना टूटी हुई देखकर पराक्रमी योद्धा एवं महारथी कृतवर्मा ने शत्रु सेना को युद्ध-क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोक दिया।
 
Seeing his army's formation broken, the mighty warrior and great warrior Kritavarman stopped the enemy's army from advancing in the battle-field.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)