श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.21.14 
चापवेगबलोद्‍धूतान् मार्गणान् वृष्णिसिंहयो:।
आकाशे समपश्याम पतङ्गानिव शीघ्रगान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हमने वृष्णिवंशी उन दोनों सिंहों के धनुषों के बल और वेग से छोड़े हुए तीव्र बाणों को देखा, मानो टिड्डियों के दल आकाश में फैल गए हों ॥14॥
 
We saw the swift arrows shot with the force and speed of the bows of those two lions of the Vrishni clan, like swarms of locusts spread across the sky. ॥14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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