श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.21.13 
चरन्तौ विविधान् मार्गान् हार्दिक्यशिनिपुङ्गवौ।
मुहुरन्तर्दधाते तौ बाणवृष्टॺा परस्परम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कृतवर्मा और सात्यकि नाना प्रकार के करतब दिखाते हुए इधर-उधर घूमने लगे और बार-बार बाणों की वर्षा करके एक-दूसरे को अदृश्य कर दिया॥13॥
 
Kritavarma and Satyaki moved about displaying various tricks, and by repeatedly showering arrows they made one another invisible.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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