Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.20.15: तत्पश्चात् महाबली धृष्टद्युम्न ने अपने कुम्भस्थल पर लक्ष्य करके पाँच सौ और उत्तम नाराच छोड़े। उनसे बुरी तरह घायल हुआ वह महाबली गजराज युद्ध से मुँह मोड़कर शीघ्रता से भागने लगा। | mahabharat अध्याय 9.20: धृष्टद्युम्नद्वारा राजा शाल्वके हाथीका और सात्यकिद्वारा राजा शाल्वका वध । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽपरान् पञ्चशतान् महात्मा
नाराचमुख्यान् विससर्ज कुम्भे।
स तैस्तु विद्ध: परमद्विपो रणे
तदा परावृत्य भृशं प्रदुद्रुवे॥ १५॥
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली धृष्टद्युम्न ने अपने कुम्भस्थल पर लक्ष्य करके पाँच सौ और उत्तम नाराच छोड़े। उनसे बुरी तरह घायल हुआ वह महाबली गजराज युद्ध से मुँह मोड़कर शीघ्रता से भागने लगा।
After that, the great man Dhrishtadyumna aimed at his Kumbhsthal and released five hundred more Uttam Narachs. That great Gajraj, who was badly injured by them, turned his back from the battle and started running away quickly. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥