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mahabharat 9.20.11: कौरवों की हर्षपूर्ण चीख और शंखध्वनि सुनकर, पांचाल के राजकुमार, पांडवों और सृंजयों के सेनापति धृष्टद्युम्न क्रोधित हो गए और इसे सहन नहीं कर सके।   |   mahabharat अध्याय 9.20: धृष्टद्युम्नद्वारा राजा शाल्वके हाथीका और सात्यकिद्वारा राजा शाल्वका वध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.20.11 
श्रुत्वा निनादं त्वथ कौरवाणां
हर्षाद् विमुक्तं सह शङ्खशब्दै:।
सेनापति: पाण्डवसृञ्जयानां
पाञ्चालपुत्रो ममृषे न कोपात्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कौरवों की हर्षपूर्ण चीख और शंखध्वनि सुनकर, पांचाल के राजकुमार, पांडवों और सृंजयों के सेनापति धृष्टद्युम्न क्रोधित हो गए और इसे सहन नहीं कर सके।
 
Hearing the joyous cries of the Kauravas accompanied by the sound of conches, Dhrishtadyumna, prince of Panchala, the commander of the Pandavas and the Srinjayas, became angry and could not tolerate it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)