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mahabharat 9.2.7: हे निष्पाप संजय! जब मैं सुनता था कि मेरे बच्चे बाल्यावस्था को पार करके युवावस्था में प्रवेश कर गए हैं और धीरे-धीरे अधेड़ावस्था को प्राप्त हो गए हैं, तो मैं हर्ष से भर जाता था।   |   mahabharat अध्याय 9.2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.2.7 
बालभावमतिक्रम्य यौवनस्थांश्च तानहम्।
मध्यप्राप्तांस्तथा श्रुत्वा हृष्ट आसं तदानघ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप संजय! जब मैं सुनता था कि मेरे बच्चे बाल्यावस्था को पार करके युवावस्था में प्रवेश कर गए हैं और धीरे-धीरे अधेड़ावस्था को प्राप्त हो गए हैं, तो मैं हर्ष से भर जाता था।
 
Sinless Sanjaya! When I used to hear that my children have surpassed childhood and entered youth and gradually reached middle age, I used to be filled with joy. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)