vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना
»
श्लोक 6
श्लोक
9.2.6
अनेत्रत्वाद् यदेतेषां न मे रूपनिदर्शनम्।
पुत्रस्नेहकृता प्रीतिर्नित्यमेतेषु धारिता॥ ६॥
अनुवाद
यद्यपि मैं अंधा था और मैंने कभी उनके रूप नहीं देखे थे, फिर भी पुत्र-स्नेह से उत्पन्न मेरे मन में उनके प्रति सदैव प्रेम था ॥6॥
Though I was blind and had never seen their forms, yet I always had the love for them born of the affection for my son. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×