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mahabharat 9.2.50-52h: जब दुर्योधन मारा जा चुका है, शल्य भी युद्ध में मारा जा चुका है और दु:शासन, विविंशति और महाबली विकर्ण भी मारे जा चुके हैं, तब भीमसेन के उन ऊँचे शब्दों को मैं कैसे सुनूँगा, जिन्होंने युद्धस्थल में अकेले ही मेरे सौ पुत्रों को मार डाला ॥50-51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 50-52h
 
 
श्लोक  9.2.50-52h 
दुर्योधनो हतो यत्र शल्यश्च निहतो युधि॥ ५०॥
दु:शासनो विविंशश्च विकर्णश्च महाबल:।
कथं हि भीमसेनस्य श्रोष्येऽहं शब्दमुत्तमम्॥ ५१॥
एकेन समरे येन हतं पुत्रशतं मम।
 
 
अनुवाद
जब दुर्योधन मारा जा चुका है, शल्य भी युद्ध में मारा जा चुका है और दु:शासन, विविंशति और महाबली विकर्ण भी मारे जा चुके हैं, तब भीमसेन के उन ऊँचे शब्दों को मैं कैसे सुनूँगा, जिन्होंने युद्धस्थल में अकेले ही मेरे सौ पुत्रों को मार डाला ॥50-51 1/2॥
 
When Duryodhana has been killed, Shalya has been killed in the war and Dushasan, Vivinshati and the mighty Vikarna have also been killed, then how will I listen to the loud words of Bhimasena, who single-handedly killed my hundred sons in the battlefield. ॥ 50-51 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)