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mahabharat 9.2.47-48h: संजय! मैं उन शुभ सौभाग्यों से वंचित हूँ और पुत्रहीन भी हूँ। आज इस वृद्धावस्था में यदि मैं शत्रु के हाथ पड़ जाऊँ, तो मेरी क्या दशा होगी, यह सोचता हूँ?॥47 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  9.2.47-48h 
अहं वियुक्तस्तैर्भाग्यै: पुत्रैश्चैवेह संजय॥ ४७॥
कथमद्य भविष्यामि वृद्ध: शत्रुवशं गत:।
 
 
अनुवाद
संजय! मैं उन शुभ सौभाग्यों से वंचित हूँ और पुत्रहीन भी हूँ। आज इस वृद्धावस्था में यदि मैं शत्रु के हाथ पड़ जाऊँ, तो मेरी क्या दशा होगी, यह सोचता हूँ?॥47 1/2॥
 
Sanjay! I am deprived of those auspicious fortunes and am also devoid of sons. Today in this old age, if I fall into the hands of the enemy, I wonder what will be my condition?॥ 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)