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mahabharat 9.2.45-46h: हाय! मेरे पराक्रमी पुत्र, पौत्र, मित्र और सगे-संबंधी सब मारे गए। इसे दुर्भाग्य के सिवा और क्या कहूँ?   |   mahabharat अध्याय 9.2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  9.2.45-46h 
पुत्राश्च मे विनिहता: पौत्राश्चैव महाबला:॥ ४५॥
वयस्या भ्रातरश्चैव किमन्यद् भागधेयत:।
 
 
अनुवाद
हाय! मेरे पराक्रमी पुत्र, पौत्र, मित्र और सगे-संबंधी सब मारे गए। इसे दुर्भाग्य के सिवा और क्या कहूँ?
 
Alas! My mighty son, grandson, friends and relatives have all been killed. What else can I call this except misfortune?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)