श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.2.41 
शकुनि: सौबलो यत्र कैतव्यश्च महाबल:।
निहत: सबलो वीर: किमन्यद् भागधेयत:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जहाँ सुबलपुत्र महाबली शकुनि और उस जुआरीपुत्र वीर उलूक दोनों ही सेनासहित मारे गए, वहाँ भाग्य के अतिरिक्त और क्या कारण हो सकता है ?॥ 41॥
 
Where the mighty Shakuni, son of Subala, and the brave Uluka, son of that gambler, were both killed along with their armies, what other reason could there be except fate?॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)