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mahabharat 9.2.32-33: जहाँ दिव्यास्त्रों का ज्ञान रखने वाला महाबली कर्ण युद्ध में मारा गया, जहाँ भूरिश्रवा, सोमदत्त और महाराज बाह्लीक रणभूमि में मारे गए, वहाँ भाग्य के अतिरिक्त और क्या कारण बताया जा सकता है?॥ 32-33॥   |   mahabharat अध्याय 9.2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  9.2.32-33 
कर्णश्च निहत: संख्ये दिव्यास्त्रज्ञो महाबल:॥ ३२॥
भूरिश्रवा हतो यत्र सोमदत्तश्च संयुगे।
बाह्लिकश्च महाराज: किमन्यद् भागधेयत:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जहाँ दिव्यास्त्रों का ज्ञान रखने वाला महाबली कर्ण युद्ध में मारा गया, जहाँ भूरिश्रवा, सोमदत्त और महाराज बाह्लीक रणभूमि में मारे गए, वहाँ भाग्य के अतिरिक्त और क्या कारण बताया जा सकता है?॥ 32-33॥
 
Where the mighty Karna, possessing the knowledge of divine weapons, was killed in the war, where Bhurishrava, Somadatta and Maharaja Bahlik were annihilated in the battlefield, what other reason can be given except fate?॥ 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)