श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.2.3 
धृतराष्ट्र उवाच
अहो बत महद्दु:खं यदहं पाण्डवान् रणे।
क्षेमिणश्चाव्ययांश्चैव त्वत्त: सूत शृणोमि वै॥ ३॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, 'सुत! मुझे आपके मुख से यह सुनकर बड़ा दुःख हो रहा है कि पाण्डव युद्धभूमि में सुरक्षित और सकुशल हैं।'
 
Dhritarashtra said, 'Sut! It is a matter of great sorrow for me that I am hearing from your mouth that the Pandavas are safe and unharmed in the battlefield.' 3
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)