श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.2.13 
को नु मामुत्थितं वीर तात तातेति वक्ष्यति।
महाराजेति सततं लोकनाथेति चासकृत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! अब जब मैं जाग जाऊँगा तो मुझे बार-बार 'तात', 'महाराज' और 'लोकनाथ' नामों से कौन पुकारेगा?॥13॥
 
Brave one! Now when I wake up who will call me by the names 'Taat', 'Maharaj' and 'Lokanath' repeatedly?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)