Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.2.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - स्त्रियों के चले जाने पर अम्बिकापुत्र राजा धृतराष्ट्र शोक से विमुख होकर विलाप करने लगे, तीव्र आहें भरते हुए और बार-बार हाथ हिलाते हुए बहुत देर तक विचारमग्न रहे और इस प्रकार बोले॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 9.2: राजा धृतराष्ट्रका विलाप करना और संजयसे युद्धका वृत्तान्त पूछना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
विसृष्टास्वथ नारीषु धृतराष्ट्रोऽम्बिकासुत:।
विललाप महाराज दु:खाद् दु:खान्तरं गत:॥ १॥
सधूममिव नि:श्वस्य करौ धुन्वन् पुन: पुन:।
विचिन्त्य च महाराज वचनं चेदमब्रवीत्॥ २॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - स्त्रियों के चले जाने पर अम्बिकापुत्र राजा धृतराष्ट्र शोक से विमुख होकर विलाप करने लगे, तीव्र आहें भरते हुए और बार-बार हाथ हिलाते हुए बहुत देर तक विचारमग्न रहे और इस प्रकार बोले॥1-2॥
Vaishmpayana says: After the departure of the women, King Dhritarashtra, the son of Ambika, going from one sorrow to another, began to lament, sighing hotly and repeatedly waving his hands. He remained lost in thought for a long time and spoke thus.॥ 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥