Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.19.64: मृत्यु के नियम से बंधे हुए मनुष्य को एक-न-एक दिन मरना ही है। घर में भी इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। इसलिए क्षत्रिय-धर्म के अनुसार, युद्ध करते समय जो मृत्यु होती है, वह क्षत्रिय के लिए शाश्वत मृत्यु है।' | mahabharat अध्याय 9.19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृत्यु के नियम से बंधे हुए मनुष्य को एक-न-एक दिन मरना ही है। घर में भी इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। इसलिए क्षत्रिय-धर्म के अनुसार, युद्ध करते समय जो मृत्यु होती है, वह क्षत्रिय के लिए शाश्वत मृत्यु है।'
‘A man who is bound by the law of death will have to die some day or the other. There is no escape from it even at home. Therefore, according to the kshatriya-dharma, the death that occurs while fighting a war is the eternal death for a kshatriya. 64.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥