श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  9.19.6-7h 
भीष्मे द्रोणे च निहते सूतपुत्रे च भारत।
यद् दु:खं तव योधानां भयं चासीद् विशाम्पते॥ ६॥
तद् भयं स च न: शोको भय एवाभ्यवर्तत।
 
 
अनुवाद
हे भारत! हे प्रजानाथ! भीष्म, द्रोण और सारथिपुत्र कर्ण के मारे जाने पर आपके योद्धाओं को जो भय और शोक हुआ था, वही भय और शोक शल्य के मारे जाने पर पुनः हमारे सामने प्रकट हुआ।॥6 1/2॥
 
O Bharata! O Prajanatha! The same fear and grief that your warriors felt when Bhishma, Drona and the son of a charioteer Karna were killed, the same fear and grief appeared before us once again (when Shalya was killed). ॥ 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)