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mahabharat 9.19.45-46h: उन्होंने युद्धभूमि में भीमसेन को चारों ओर से घेर लिया और उन पर प्रहार करने लगे। पैदल सेना से घिरे भीमसेन ने उनके अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार सहा, किन्तु मैनाक पर्वत की भाँति अपने स्थान से टस से मस नहीं हुए।   |   mahabharat अध्याय 9.19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  9.19.45-46h 
परिवार्य रणे भीमं निजघ्नुस्ते समन्तत:।
स वध्यमान: समरे पदातिगणसंवृत:॥ ४५॥
न चचाल तत: स्थानान्मैनाक इव पर्वत:।
 
 
अनुवाद
उन्होंने युद्धभूमि में भीमसेन को चारों ओर से घेर लिया और उन पर प्रहार करने लगे। पैदल सेना से घिरे भीमसेन ने उनके अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार सहा, किन्तु मैनाक पर्वत की भाँति अपने स्थान से टस से मस नहीं हुए।
 
They surrounded Bhimasena from all sides on the battlefield and started attacking him. Surrounded by infantry, Bhimasena bore the brunt of their weapons but did not move from his place like the Mainak mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)