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mahabharat 9.19.44: भीमसेन के पास पहुँचकर वे क्रोधित कौरव योद्धा केवल गर्जना करने लगे, और कुछ नहीं बोले।   |   mahabharat अध्याय 9.19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.19.44 
आसाद्य भीमसेनं तु संरब्धा युद्धदुर्मदा:।
धार्तराष्ट्रा विनेदुर्हि नान्यामकथयन् कथाम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन के पास पहुँचकर वे क्रोधित कौरव योद्धा केवल गर्जना करने लगे, और कुछ नहीं बोले।
 
On reaching Bhimasena, those furious Kaurava warriors only started roaring and did not say anything else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)