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mahabharat 9.19.43: तदनन्तर युद्धस्थल में उपस्थित अन्य पैदल सैनिक हर्ष और उत्साह से भरे हुए, हाथ ताली बजाते और गर्जना करते हुए वीरलोक में जाने की इच्छा से भीमसेन के सामने आये।   |   mahabharat अध्याय 9.19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.19.43 
भीममेवाभ्यवर्तन्त रणेऽन्ये तु पदातय:।
प्रक्ष्वेडॺास्फोटॺ संहृष्टा वीरलोकं यियासव:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर युद्धस्थल में उपस्थित अन्य पैदल सैनिक हर्ष और उत्साह से भरे हुए, हाथ ताली बजाते और गर्जना करते हुए वीरलोक में जाने की इच्छा से भीमसेन के सामने आये।
 
Then the other foot soldiers on the battlefield, filled with joy and enthusiasm, clapping their arms and roaring, came in front of Bhimasena with the desire to go to the world of heroes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)