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mahabharat 9.19.41: परस्पर हर्ष से भरे हुए तथा एक-दूसरे पर आक्रमण करने वाले दोनों पक्षों के सैनिकों का जो भयंकर एवं महान् युद्ध हुआ, वह अत्यन्त भयानक था ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 9.19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.19.41 
तेषामापततां तत्र संहृष्टानां परस्परम्।
सम्मर्द: सुमहान् जज्ञे घोररूपो भयानक:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
परस्पर हर्ष से भरे हुए तथा एक-दूसरे पर आक्रमण करने वाले दोनों पक्षों के सैनिकों का जो भयंकर एवं महान् युद्ध हुआ, वह अत्यन्त भयानक था ॥ 41॥
 
The fierce and great fight between the soldiers of both sides, filled with mutual joy and attacking each other, was very terrible. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)