श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  9.19.36 
सिंहनादांश्च बहुश: शृणु घोरान् भयावहान्।
तस्माद् याहि शनै: सूत जघनं परिपालय॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
सुत! सुनो, वहाँ बार-बार भयंकर गर्जना हो रही है, जिससे भय उत्पन्न हो रहा है। अतः तुम धीरे-धीरे चलो और सेना के पिछले भाग की रक्षा करो।
 
Suta! Listen there, there are loud roars again and again, instilling fear. Therefore you move slowly and protect the rear of the army. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)