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mahabharat 9.19.32: भीमसेन के भय से अपने समस्त योद्धाओं को भागते देख विजय की इच्छा से दुर्योधन ने अपने सारथि से कहा -॥32॥   |   mahabharat अध्याय 9.19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.19.32 
तान् प्रेक्ष्य द्रवत: सर्वान् भीमसेनभयार्दितान्।
दुर्योधनस्तदा सूतमब्रवीद् विजयाय च॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन के भय से अपने समस्त योद्धाओं को भागते देख विजय की इच्छा से दुर्योधन ने अपने सारथि से कहा -॥32॥
 
Seeing all his warriors fleeing in fear of Bhimasena, Duryodhana, desiring victory, said to his charioteer -॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)