भीष्मं द्रोणं च कर्णं च मद्रराजानमेव च।
तथान्यान् नृपतीन् वीरान् शतशोऽथ सहस्रश:॥ २८॥
कोऽन्य: शक्तो रणे जेतुमृते पार्थाद् युधिष्ठिरात्।
यस्य नाथो हृषीकेश: सदा सत्ययशोनिधि:॥ २९॥
अनुवाद
कुंतीपुत्र युधिष्ठिर के अतिरिक्त ऐसा कौन राजा है जो युद्धस्थल में भीष्म, द्रोण, कर्ण, मद्रराज शल्य तथा अन्य सैकड़ों-हजारों राजाओं को जीत सके? यह सफलता केवल वही प्राप्त कर सकता है जिसके स्वामी और रक्षक भगवान श्रीकृष्ण हों, जो सदैव सत्य और यश के सागर हैं।'
‘Who other than Kuntiputra Yudhishthira is the king who can win over Bhishma, Drona, Karna, Madraraj Shalya and hundreds and thousands of other kings on the battlefield? Only he can achieve this success whose master and protector is Lord Krishna, who is always the ocean of truth and fame.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥