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mahabharat 9.19.27: जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी भगवान जनार्दन श्रीकृष्ण के आश्रय में हैं और जो धर्म के आश्रय में हैं, वे क्यों न विजयी हों?॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 9.19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  9.19.27 
येषां च जगतीनाथो नाथ: कृष्णो जनार्दन:।
कथं तेषां जयो न स्याद् येषां धर्मो व्यपाश्रय:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी भगवान जनार्दन श्रीकृष्ण के आश्रय में हैं और जो धर्म के आश्रय में हैं, वे क्यों न विजयी हों?॥ 27॥
 
Why should not those, who have the protection of Lord Janardana Sri Krishna, the Lord of the entire universe, and who have the shelter of Dharma, be victorious?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)