श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवसैनिकोंका आपसमें बातचीत करते हुए पाण्डवोंकी प्रशंसा और धृतराष्ट्रकी निन्दा करना तथा कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  9.19.17-18h 
अद्य जानातु कौन्तेयं समर्थं सर्वधन्विनाम्।
अद्यात्मानं च दुर्मेधा गर्हयिष्यति पापकृत्॥ १७॥
अद्य क्षत्तुर्वच: सत्यं स्मरतां ब्रुवतो हितम्।
 
 
अनुवाद
आज उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि कुन्तीपुत्र अर्जुन समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ एवं पराक्रमी है। आज पापी एवं दुष्ट बुद्धि वाले धृतराष्ट्र को जी भरकर अपनी निन्दा करनी चाहिए तथा विदुरजी के कहे हुए सत्य एवं हितकारी वचनों का स्मरण करना चाहिए।
 
‘Today they should understand that Kunti's son Arjun is the best and most powerful among all archers. Today the sinful and evil-minded Dhritarashtra should criticize himself to his heart's content and remember the true and beneficial words spoken by Vidurji.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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