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mahabharat 9.18.36-37: जब मद्रराज के वीर सैनिक मारे गये और हम पर आक्रमण हुआ, तब विजय की इच्छा रखने वाले महाबली पाण्डव योद्धा शंखध्वनि के साथ बाणों की ध्वनि फैलाते हुए बड़े वेग से हमारी ओर आये।   |   mahabharat अध्याय 9.18: मद्रराजके अनुचरोंका वध और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 18: मद्रराजके अनुचरोंका वध और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  9.18.36-37 
निहतेषु च शूरेषु मद्रराजानुगेषु वै।
अस्मानापततश्चापि दृष्ट्वा पार्था महारथा:॥ ३६॥
अभ्यवर्तन्त वेगेन जयगृद्धा: प्रहारिण:।
बाणशब्दरवान् कृत्वा विमिश्रान् शङ्खनि:स्वनै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जब मद्रराज के वीर सैनिक मारे गये और हम पर आक्रमण हुआ, तब विजय की इच्छा रखने वाले महाबली पाण्डव योद्धा शंखध्वनि के साथ बाणों की ध्वनि फैलाते हुए बड़े वेग से हमारी ओर आये।
 
When the valiant soldiers of the King of Madra were killed and we were attacked, the mighty Pandava warriors, desirous of victory, came towards us with great speed, spreading the sound of their arrows along with the sound of conches.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)