Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.18.22-24: शकुनि ने कहा— हे मनुष्यों के स्वामी! युद्धस्थल में क्रोध और आवेश से अभिभूत योद्धा अपने स्वामी की आज्ञा का पालन नहीं करते; ऐसी स्थिति में उन पर क्रोध करना उचित नहीं है। यह उनकी उपेक्षा करने का समय नहीं है। हम सभी को हाथी, घोड़े और रथ लेकर मद्रराज के महाधनुर्धर योद्धाओं की रक्षा के लिए एकत्रित होना चाहिए और बड़े यत्न से एक-दूसरे की रक्षा करनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 9.18: मद्रराजके अनुचरोंका वध और कौरव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शकुनिरुवाच
न भर्तु: शासनं वीरा रणे कुर्वन्त्यमर्षिता:॥ २२॥
अलं क्रोद्धुमथैतेषां नायं काल उपेक्षितुम्।
याम: सर्वे च सम्भूय सवाजिरथकुञ्जरा:॥ २३॥
परित्रातुं महेष्वासान् मद्रराजपदानुगान्।
अन्योन्यं परिरक्षामो यत्नेन महता नृप॥ २४॥
अनुवाद
शकुनि ने कहा— हे मनुष्यों के स्वामी! युद्धस्थल में क्रोध और आवेश से अभिभूत योद्धा अपने स्वामी की आज्ञा का पालन नहीं करते; ऐसी स्थिति में उन पर क्रोध करना उचित नहीं है। यह उनकी उपेक्षा करने का समय नहीं है। हम सभी को हाथी, घोड़े और रथ लेकर मद्रराज के महाधनुर्धर योद्धाओं की रक्षा के लिए एकत्रित होना चाहिए और बड़े यत्न से एक-दूसरे की रक्षा करनी चाहिए।
Shakuni said— O Lord of men! In the battlefield, the warriors overcome by anger and rage do not obey their master's command; in such a condition it is not right to get angry at them. This is not the time to ignore them. All of us should come together with elephants, horses and chariots to protect the great archers of the Madra king and protect each other with great effort.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥