Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.17.d3: पूर्वकाल में त्रिपुरों का संहार करते समय भगवान महेश्वर का जो रूप प्रकट हुआ था, वही रूप शल्य का वध करते समय धर्मात्मा युधिष्ठिर का भी था। वे अपनी किरणों से बहुत प्रकाश फैला रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  9.17.d3 
(स्फुरत्प्रभामण्डलमंशुजालै-
र्धर्मात्मनो मद्रविनाशकाले।
पुरत्रयप्रोत्सरणे पुरस्ता-
न्माहेश्वरं रूपमभूत् तदानीम्॥ )
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में त्रिपुरों का संहार करते समय भगवान महेश्वर का जो रूप प्रकट हुआ था, वही रूप शल्य का वध करते समय धर्मात्मा युधिष्ठिर का भी था। वे अपनी किरणों से बहुत प्रकाश फैला रहे थे।
 
The form of Lord Maheshwara that had appeared when he was destroying Tripuras in the past was the same as the form of the righteous Yudhishthira when he was killing Shalya. He was spreading a lot of light through his rays.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)