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mahabharat 9.17.91: जैसे पूर्वकाल में वृत्रासुर को मारकर देवताओं ने इन्द्र की स्तुति की थी, उसी प्रकार समस्त पाण्डवों ने युद्धस्थल में युधिष्ठिर की बहुत प्रशंसा की और वे सब नाना प्रकार के वाद्यों की ध्वनि फैलाकर पृथ्वी को गुंजायमान करने लगे॥91॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  9.17.91 
युधिष्ठिरं च प्रशशंसुराजौ
पुरा कृते वृत्रवधे यथेन्द्रम्।
चक्रुश्च नानाविधवाद्यशब्दान्
निनादयन्तो वसुधां समेता:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
जैसे पूर्वकाल में वृत्रासुर को मारकर देवताओं ने इन्द्र की स्तुति की थी, उसी प्रकार समस्त पाण्डवों ने युद्धस्थल में युधिष्ठिर की बहुत प्रशंसा की और वे सब नाना प्रकार के वाद्यों की ध्वनि फैलाकर पृथ्वी को गुंजायमान करने लगे॥91॥
 
Just as the gods had praised Indra after he had killed Vritraasura in the past, similarly all the Pandavas praised Yudhishthira profusely on the battlefield and they all began to spread the sound of various kinds of musical instruments, making the earth resonate.॥91॥
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि शल्यवधे सप्तदशोऽध्याय:॥ १७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें शल्यका वधविषयक सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ९४ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)