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mahabharat 9.17.90: जब कुरुकुल के युवराज युधिष्ठिर ने युद्ध में महाधनुर्धर शल्य को मार डाला, तब कुन्ती के सभी पुत्र इकट्ठे होकर बड़े हर्ष से भर गए और शल्य को मारा हुआ देखकर शंख बजाने लगे ॥90॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  9.17.90 
तस्मिन् महेष्वासवरे विशस्ते
संग्राममध्ये कुरुपुङ्गवेन।
पार्था: समेता: परमप्रहृष्टा:
शङ्खान् प्रदध्मुर्हतमीक्ष्य शल्यम्॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
जब कुरुकुल के युवराज युधिष्ठिर ने युद्ध में महाधनुर्धर शल्य को मार डाला, तब कुन्ती के सभी पुत्र इकट्ठे होकर बड़े हर्ष से भर गए और शल्य को मारा हुआ देखकर शंख बजाने लगे ॥90॥
 
When the great archer Shalya was killed in the battle by Yudhishthira, the crown prince of Kurukula, all the sons of Kunti gathered together and were filled with great joy and after seeing Shalya killed, they started blowing conch shells. 90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)