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mahabharat 9.17.81-82h: हे महात्मन! तत्पश्चात् दो घड़ी के अन्दर ही उन सबने देखा कि नाना प्रकार के रक्त के बहने से पृथ्वी पर उड़ती हुई धूलि नीचे बैठ गई है।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 81-82h
 
 
श्लोक  9.17.81-82h 
ततो मुहूर्तात् तेऽपश्यन् रजो भीमं समुत्थितम्॥ ८१॥
विविधै: शोणितस्रावै: प्रशान्तं पुरुषर्षभ।
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! तत्पश्चात् दो घड़ी के अन्दर ही उन सबने देखा कि नाना प्रकार के रक्त के बहने से पृथ्वी पर उड़ती हुई धूलि नीचे बैठ गई है।
 
O great man! Thereafter within two hours they all saw that the dust that was flying on the earth had settled down due to the flowing of various kinds of blood. 81 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)