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mahabharat 9.17.77-78h: तत्पश्चात् उसने अपने सुशिक्षित भालों से प्रहार करके उसके रथ, जूए और तलवारों के डण्डे को काट डाला तथा शीघ्र ही उसके घोड़ों और दोनों पार्श्वरक्षकों को भी मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  9.17.77-78h 
ततो रथं युगेषां च च्छित्त्वा भल्लै: सुसंयतै:॥ ७७॥
अश्वांस्तस्यावधीत् तूर्णमुभौ च पार्ष्णिसारथी।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने अपने सुशिक्षित भालों से प्रहार करके उसके रथ, जूए और तलवारों के डण्डे को काट डाला तथा शीघ्र ही उसके घोड़ों और दोनों पार्श्वरक्षकों को भी मार डाला।
 
Thereafter, by striking his well-trained spears, he cut off his chariot, yoke and staff (of swords) and soon killed his horses and his two side guards also. 77 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)