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mahabharat 9.17.76-77h: उस उत्तम धनुष को लेकर समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ सात्यकि ने दस बाणों से कृतवर्मा की छाती पर गहरे घाव कर दिये।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 76-77h
 
 
श्लोक  9.17.76-77h 
तदादाय धनु: श्रेष्ठं वरिष्ठ: सर्वधन्विनाम्॥ ७६॥
हार्दिक्यं दशभिर्बाणै: प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे।
 
 
अनुवाद
उस उत्तम धनुष को लेकर समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ सात्यकि ने दस बाणों से कृतवर्मा की छाती पर गहरे घाव कर दिये।
 
Taking that excellent bow, Satyaki, the foremost of all archers, inflicted deep wounds on the chest of Kritavarma with ten arrows. 76 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)