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mahabharat 9.17.70-71h: राजन! दुःखी एवं दुर्जय महाधनुर्धर सात्यकि को आक्रमण करते देख कृतवर्मा ने निर्भय वीर की भाँति शीघ्रतापूर्वक उन्हें रोक दिया। 70 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  9.17.70-71h 
तमायान्तं महेष्वासं दुष्प्रसह्यं दुरासदम्॥ ७०॥
हार्दिक्यस्त्वरितो राजन् प्रत्यगृह्णादभीतवत्।
 
 
अनुवाद
राजन! दुःखी एवं दुर्जय महाधनुर्धर सात्यकि को आक्रमण करते देख कृतवर्मा ने निर्भय वीर की भाँति शीघ्रतापूर्वक उन्हें रोक दिया। 70 1/2॥
 
Rajan! Seeing the sad and formidable great archer Satyaki attacking, Kritavarman quickly stopped them like a fearless hero. 70 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)