श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  9.17.67-68h 
विचित्रकवचे तस्मिन् हते मद्रनृपानुजे॥ ६७॥
हाहाकारं प्रकुर्वाणा: कुरवोऽभिप्रदुद्रुवु:।
 
 
अनुवाद
मद्रराज का वह छोटा भाई विचित्र कवच से सुशोभित था। उसके मारे जाने पर समस्त कौरव विलाप करते हुए भाग गए। 67 1/2
 
That younger brother of the King of Madra was adorned with a strange armour. When he was killed all the Kauravas fled wailing. 67 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)