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mahabharat 9.17.63-64h: तब धर्मराज ने शीघ्रतापूर्वक छः बाणों से उसे घायल कर दिया और दो तलवारों से उसका धनुष और ध्वजा काट डाली।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  9.17.63-64h 
तं विव्याधाशुगै: षड्‍‍भिर्धर्मराजस्त्वरन्निव॥ ६३॥
कार्मुकं चास्य चिच्छेद क्षुराभ्यां ध्वजमेव च।
 
 
अनुवाद
तब धर्मराज ने शीघ्रतापूर्वक छः बाणों से उसे घायल कर दिया और दो तलवारों से उसका धनुष और ध्वजा काट डाली।
 
Then Dharamraj quickly pierced him with six arrows and cut off his bow and flag with two swords.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)