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mahabharat 9.17.62-63h: अपने मृत भाई का बदला लेने की इच्छा से युद्ध में क्रोधित उस महारथी ने उसे अनेक बाणों से घायल करना आरम्भ किया।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  9.17.62-63h 
विव्याध च नरश्रेष्ठो नाराचैर्बहुभिस्त्वरन्॥ ६२॥
हतस्यापचितिं भ्रातुश्चिकीर्षुर्युद्धदुर्मद:।
 
 
अनुवाद
अपने मृत भाई का बदला लेने की इच्छा से युद्ध में क्रोधित उस महारथी ने उसे अनेक बाणों से घायल करना आरम्भ किया।
 
Desiring to avenge his dead brother, that great warrior, furious with battle, began to wound him with many arrows. 62 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)