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mahabharat 9.17.57-58h: जब शक्ति ने राजा शल्य की छाती में छेद कर दिया था, उनके हथियार और ध्वजाएँ टूटकर बिखर गए थे और वे सदा के लिए मौन हो गए थे, तब देवी लक्ष्मी (सुन्दरता या तेज) राजा भीमद्र को नहीं छोड़ रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.17.57-58h 
शक्त्या विभिन्नहृदयं विप्रविद्धायुधध्वजम्॥ ५७॥
संशान्तमपि मद्रेशं लक्ष्मीर्नैव विमुञ्चति।
 
 
अनुवाद
जब शक्ति ने राजा शल्य की छाती में छेद कर दिया था, उनके हथियार और ध्वजाएँ टूटकर बिखर गए थे और वे सदा के लिए मौन हो गए थे, तब देवी लक्ष्मी (सुन्दरता या तेज) राजा भीमद्र को नहीं छोड़ रही थीं।
 
When Shakti had pierced King Shalya's chest, his weapons and flags were shattered and scattered and he had become silent forever, then Goddess Lakshmi (beauty or radiance) was not leaving King Bhimdra. 57 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)