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mahabharat 9.17.55-56h: प्रिय कान्त के समान इस वसुधा का दीर्घकाल तक उपभोग करके राजा शल्य उसे अपने समस्त अंगों से आलिंगन करके सो गए ॥55 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  9.17.55-56h 
चिरं भुक्त्वा वसुमतीं प्रियां कान्तामिव प्रभु:॥ ५५॥
सर्वैरङ्गै: समाश्लिष्य प्रसुप्त इव चाभवत्।
 
 
अनुवाद
प्रिय कान्त के समान इस वसुधा का दीर्घकाल तक उपभोग करके राजा शल्य उसे अपने समस्त अंगों से आलिंगन करके सो गए ॥55 1/2॥
 
After enjoying this Vasudha for a long time like beloved Kant, King Salya fell asleep after embracing her with all his limbs. 55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)