Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.17.54-55h: उसके शरीर के सभी अंग छिन्न-भिन्न हो गए थे और वह रक्त से लथपथ था। जिस प्रकार प्रिय कामिनी अपने प्रियतम का, जो उसके वक्षस्थल पर गिरना चाहता है, प्रेमपूर्वक स्वागत करती है, उसी प्रकार पृथ्वी ने भी अपने ऊपर गिरे हुए पुरुषोत्तम शल्य का प्रेमपूर्वक स्वागत किया। | mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तथा भिन्नसर्वाङ्गो रुधिरेण समुक्षित:।
प्रत्युद्गत इव प्रेम्णा भूम्या स नरपुङ्गव:॥ ५४॥
प्रियया कान्तया कान्त: पतमान इवोरसि।
अनुवाद
उसके शरीर के सभी अंग छिन्न-भिन्न हो गए थे और वह रक्त से लथपथ था। जिस प्रकार प्रिय कामिनी अपने प्रियतम का, जो उसके वक्षस्थल पर गिरना चाहता है, प्रेमपूर्वक स्वागत करती है, उसी प्रकार पृथ्वी ने भी अपने ऊपर गिरे हुए पुरुषोत्तम शल्य का प्रेमपूर्वक स्वागत किया।
All his body parts were torn and he was soaked in blood. Just as a beloved Kamini lovingly welcomes her lover who wants to fall on her bosom, in the same way the earth lovingly accepted the greatest of men Shalya who was falling on her.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥