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mahabharat 9.17.53: मद्रराज शल्य ने धर्मराज युधिष्ठिर के सामने अपनी दोनों भुजाएँ फैला दीं और ऊँचे इन्द्रधनुषी ध्वज के समान ढह गये। 53॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.17.53 
बाहू प्रसार्याभिमुखो धर्मराजस्य मद्रराट्।
ततो निपतितो भूमाविन्द्रध्वज इवोच्छ्रित:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
मद्रराज शल्य ने धर्मराज युधिष्ठिर के सामने अपनी दोनों भुजाएँ फैला दीं और ऊँचे इन्द्रधनुषी ध्वज के समान ढह गये। 53॥
 
Madraraj Shalya spread both his arms in front of Dharamraj Yudhishthir and collapsed like a high rainbow flag. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)